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दिल्ली की हर दुकान के लिए बिल और उधार

कॉलोनी के बाज़ार की दुकान और ऊपर के कमरे के कार्टन, एक फ़ोन पर साथ-साथ गिने जाते हैं।

पुरानी दिल्ली की मेवों की दुकान में काले खजूर की ट्रे और स्टील के तराज़ू के पीछे बैठा बेचने वाला
पुरानी दिल्ली की मेवों की दुकान में काले खजूर की ट्रे और स्टील के तराज़ू के पीछे बैठा बेचने वाला फ़ोटो: Manjit Singh, CC BY-SA 4.0

दिल्ली का काउंटर अपनी शाम कहाँ खोता है: फ़्लैट की सूची, दिवाली के डिब्बे और ऊपर का कमरा

  1. फ़्लैटों से सूची लेकर आया लड़का

    दिल्ली की कॉलोनी में आपके आधे ग्राहक दुकान के ऊपर और पीछे के फ़्लैटों में रहते हैं। वे दुकान में चलकर नहीं आते। कोई बच्चा या बाई सूची लेकर नीचे आती है, आप सामान बाँधते हैं, और बिल एक पर्ची पर जाता है जो शाम तक खो जाती है। उस परिवार ने पैसे दिए या कहा कि लिख लो, यह बात आप महीने के आख़िर तक अपने सिर में रखते हैं। कॉलोनी की दुकान में यह सूची रोज़ की बात है।

  2. वह दफ़्तर जो आख़िरी शाम अपने दिवाली के डिब्बों के लिए चपरासी भेजता है

    दफ़्तर दिवाली पर तोहफ़े देते हैं और मेवे और मिठाई के डिब्बे दर्जनों में मँगाते हैं, जो वे अपने बताए दिन देर शाम उठाते हैं। चपरासी को ऐसा बिल चाहिए जिसे उसके अकाउंट्स वाले मान लें, और वह जल्दी में है। शाम की भीड़ के अँधेरे में हाथ से लिखा बिल, हाशिये में जोड़ा हुआ टैक्स, एक हफ़्ते बाद किसी सवाल के साथ आपके पास लौटता है।

  3. ग्राहक काउंटर पर खड़ा है, और सीढ़ी ऊपर जाती है

    दिल्ली की इस गली में किराया इतना ऊँचा है कि दुकान कुछ फ़ुट चौड़ी रह गई। बड़े पैक के लिए ग्राहक खड़ा रहता है और कोई तहख़ाने या दूसरी दुकान के ऊपर की मंज़िल पर चढ़ता है। आपको लगा कि कम बचा है, इसलिए नया ऑर्डर चला गया, और दो हफ़्ते बाद वही पैक कार्टनों के पीछे दिखा।

दिवाली का चित्र: लड्डू और काजू कतली का खुला डिब्बा, आगे दीये और ऊपर फुलझड़ियाँ
दिवाली का चित्र: लड्डू और काजू कतली का खुला डिब्बा, आगे दीये और ऊपर फुलझड़ियाँ

दिवाली के बाद के सोमवार से उस घर तक जो अपनी बाई बदल लेता है

  • नई बाई कहे कि तेल कभी आया ही नहीं, तो पन्ना जवाब देता है

    घर अपनी बाई अक्सर बदल लेते हैं, और नई को पता नहीं होता कि पिछले हफ़्ते क्या आया था। घर के नाम का एक पन्ना रखिए। शक आए, तो उसे खोलिए और तारीख़ के साथ बिल दिखा दीजिए कि उस पर क्या था। दरवाज़े की बात छोटी रहती है, और घर आपसे ख़रीदता रहता है। दुकान की कॉलोनी में यह भरोसा सबसे पहले काम आता है।

  • केटरर को आने से पहले हाँ या ना बता दी जाती है

    शादी के केटरर, किसी कैंटीन या छोटी दुकान को ढेर सा तेल, आटा या चीनी चाहिए हो सकता है, जिसका पैसा वे कार्यक्रम के बाद देंगे। वे आपसे उधार पर माल माँग सकते हैं, और किसे मिले यह आप तय करते हैं। उनका बक़ाया बग़ल के परिवारों के उधार से अलग रहता है, इसलिए एक तरह का उधार दूसरे को कभी नहीं छिपाता।

  • दिवाली के बाद का सोमवार दो गिनतियों से शुरू होता है

    दिवाली के बाद के सोमवार को दुकान की गिनती और ऊपर के कमरे की गिनती अगल-बगल रखी होती हैं। जो साइज़ काउंटर पर बिक गए पर ऊपर अब भी रखे हैं, वो नीचे लाए जाते हैं, दोबारा ख़रीदे नहीं जाते। थोक की गलियों की सूची में बस वही जाता है जो दोनों गिनतियों में निकला दिखे, और वह चक्कर एक ही बार लगता है।

पुरानी दिल्ली की एक दुकान के काउंटर पर मसालों, मेवों और सूखे फलों की स्टील की ट्रे, जिन पर सफ़ेद काग़ज़ के रेट के पर्चे हैं
पुरानी दिल्ली की एक दुकान के काउंटर पर मसालों, मेवों और सूखे फलों की स्टील की ट्रे, जिन पर सफ़ेद काग़ज़ के रेट के पर्चे हैं फ़ोटो: Michael Vito from South Orange, NJ, USA, CC BY-SA 2.0
कनॉट प्लेस में केलों और शकरकंद के पास सपाट तवे पर आलू चाट हिलाता एक बेचने वाला
कनॉट प्लेस में केलों और शकरकंद के पास सपाट तवे पर आलू चाट हिलाता एक बेचने वाला फ़ोटो: ampersandyslexia, CC BY-SA 2.0

जब दुकान कुछ फ़ुट चौड़ी हो और थोक वाला शहर के उस पार

  • उधार खाता

    फ़्लैट का नंबर पन्ने के नाम का हिस्सा है, इसलिए एक ही उपनाम वाले दो परिवारों की मंज़िलें आपस में नहीं मिलतीं और पहली मंज़िल का बिल दूसरी के पन्ने पर कभी नहीं चढ़ता।

  • गोदाम का स्टॉक

    खारी बावली का लॉट आते ही ऊपर के कमरे की अपनी गिनती में लिखा जाता है, इसलिए ऑर्डर से पहले कार्टन देखने कोई सीढ़ियाँ नहीं चढ़ता।

  • फ़ोन पर बिल

    सूची लाने वाले बच्चे या बाई के सामने बँधते-बँधते बिल बनता है, और WhatsApp पर उसे नहीं, परिवार के दिए नंबर पर जाता है।

  • GST बिल

    दिवाली के डिब्बे मँगाने वाले दफ़्तर का चपरासी काउंटर पर खड़ा है और उसके अकाउंट्स विभाग को टैक्स निकला जीएसटी बिल चाहिए। वही बिल उसके खड़े-खड़े बन जाता है, ताकि चपरासी को दोबारा चक्कर न काटना पड़े।

  • दूसरे व्यापारियों को बेचें

    दिवाली के डिब्बे दर्जन के हिसाब से मँगाने वाला दफ़्तर कारोबारी ख़रीदार बनकर आवेदन करता है, और हाँ कहने के बाद उसका जीएसटी बिल काउंटर पर बनता है।

दिल्ली के दुकानदार बाई, केटरर और दिवाली के डिब्बे के बारे में क्या पूछते हैं

दफ़्तर अपने दिवाली के डिब्बे लेने चपरासी को भेजता है, पर उसके हिसाब-किताब को बिल दफ़्तर के नाम पर चाहिए। मैं क्या करूँ?

बिल दफ़्तर के नाम के पन्ने पर बनाइए, और उसे उस आदमी के नंबर पर भेजिए जो दफ़्तर का हिसाब देखता है। चपरासी बस डिब्बे ले जाता है।

केटरर शादी के लिए ढेर सारा तेल और आटा उधार माँगता है, और मैं उसे कभी मिला नहीं। क्या मैं मना कर सकता हूँ?

हाँ। शादी के केटरर का माल बहुत बड़ा होता है, और अनजान का माल उधार पर रोकने लायक है। उधार को मना कीजिए और माल काउंटर पर नक़द बेचिए। फ़ैसला आपका है।

तोहफ़े की पेटी में मेवों का मेल मैं हर साल नया बनाता हूँ। क्या हर साल की पेटी अलग आइटम हो सकती है?

हाँ। हर साल की पेटी को अलग नाम से अलग आइटम बना लीजिए, तब दोनों साल की बिक्री आमने-सामने पढ़ी जाती है: दिवाली पर पिछले साल की पेटी कितनी गई और इस साल की कितनी, और दफ़्तरों ने दर्जन के हिसाब से किस साल का मेल लिया।

हर दुकान के और सवाल

दिल्ली के कई काउंटरों के पीछे का पुराना बाज़ार

पुरानी दिल्ली का चाँदनी चौक तीन सदी से ज़्यादा से बाज़ार है: मसालों के लिए खारी बावली, सोने, चाँदी और मोती के गहनों के लिए दरीबा कलाँ, कपड़ों के लिए कटरा नील। मसाले, कपड़ा या गहने बेचने वाली कॉलोनी की दुकान अपना माल इन्हीं गलियों से ले सकती है, और थोक वाले के बिल का रेट वही है जिससे आपका अपना रेट बनता है।

पुरानी दिल्ली का भागीरथ पैलेस बिजली के सामान का एशिया का सबसे बड़ा बाज़ार बताया जाता है, और नई सड़क स्कूल-कॉलेज की किताबें थोक और फुटकर बेचती है। स्विच, तार या स्कूल की किताबें बेचने वाली दुकान अपना माल इन्हीं गलियों में ख़रीदती है, फिर अपनी कॉलोनी में अपने रेट पर बेचती है।