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बार-बार आने वाले ग्राहकों के लिए छूट और कूपन

अपने पक्के ग्राहकों को आप चेहरे से पहचानते हैं। अब उन्हें लौटने की एक ऐसी वजह दीजिए जो लिखी जा सके।

कपड़े की दुकान में एक डंडे पर लटके धारीदार और सादे कपड़े के थान
कपड़े की दुकान में एक डंडे पर लटके धारीदार और सादे कपड़े के थान फ़ोटो: McKay Savage from London, UK, CC BY 2.0

ऐसी छूट जो समझाई जा सके, ऐसा कूपन जो हाथ में थमाया जा सके

  • उस पार का पर्चा हफ़्ते भर का है, सोमवार की कटौती जब तक वो आती है तब तक

    सड़क के उस पार की नई प्रेस हर गठरी में पर्चा डालती है, और वो पर्चा एक हफ़्ते का ऑफ़र है। आपकी छूट वो कटौती है जो उसे हर सोमवार मिलेगी, ये उसे पता है, और बिल पर लिखी लाइन वही है जो वो उस पड़ोसन को दिखा सकती है जो पूछे कि वो यहीं क्यों आती है।

  • पूरे परिवार के लिए एक ऑफ़र, हर मिज़ाज के लिए अलग नहीं

    दुल्हन के परिवार के लिए एक कूपन बनाइए और बुआ और चचेरी बहन को भी उसका इस्तेमाल करने दीजिए। सबके लिए भाव एक ही रहता है, और आपको किसी मेहरबानी की सफ़ाई नहीं देनी पड़ती। कोई और ग्राहक पूछे, तो उसे बताया जा सकता है कि ऑफ़र क्या है और किसके लिए बना था। उसे नियम वैसा ही बताया जाता है जैसा लिखा गया था, और वो इसे मेहरबानी नहीं समझता।

  • लौटकर आए लड़के की कटौती एक लाइन है, मेहरबानी नहीं

    जिस लड़के की स्क्रीन बदली थी, वो दूसरी दरार के लिए लौटता है। लौटने वाले ग्राहक की कटौती उसके नए बिल पर अपनी एक लाइन की तरह चढ़ती है, इसलिए उसे दिखता है कि क्या घटाया गया और आपको दिन की बिक्री में दिखता है। ये दुकान का नियम है, याददाश्त से की गई मेहरबानी नहीं।

काउंटर पर बैठा दुकानदार दो ग्राहक औरतों को शंख की चूड़ियाँ दिखा रहा है
काउंटर पर बैठा दुकानदार दो ग्राहक औरतों को शंख की चूड़ियाँ दिखा रहा है फ़ोटो: Biswarup Ganguly, CC BY 3.0
रिपेयर के लिए खुला फ़ोन, बग़ल में नई स्क्रीन, बैटरी और पेचकस
रिपेयर के लिए खुला फ़ोन, बग़ल में नई स्क्रीन, बैटरी और पेचकस फ़ोटो: Triskal, CC BY-SA 4.0

हर सोमवार की कपड़ों की गठरी, दुल्हन की बहनें और फिर टूटने वाला फ़ोन

  • हर सोमवार आने वाली गठरी

    प्रेस की दुकान पर कुछ परिवार हर सोमवार कमीज़ों और साड़ियों की गठरी लाते हैं। सड़क के उस पार नई प्रेस खुली है और हर गठरी में पर्चा डाल देती है। मालिक जिन्हें याद रखता है, उनसे थोड़ा कम ले लेता है, पर प्रेस पर खड़े लड़के को वो परिवार याद नहीं। जिस औरत को छूट की उम्मीद थी, वो नाराज़ होकर घर जाती है, और अगले सोमवार उसकी गठरी सड़क के उस पार चली जाती है।

  • दुल्हन की बहनें, चचेरी बहनें और बुआ

    शादी से पहले एक परिवार चूड़ी की दुकान पर आता है। हफ़्तों बाद एक बुआ आती है, फिर एक चचेरी बहन, हर कोई कहती है कि दुल्हन की माँ ने भेजा है। उस दिन आप जिन्हें पसंद करते हैं उन्हें नरम भाव लगा देते हैं, और जो औरत ये देख रही थी वो पूछती है कि उसका भाव अलग क्यों था।

  • जो एक बार टूटी स्क्रीन के लिए आया था

    तीन महीने पहले एक लड़के ने आपकी रिपेयर बेंच पर फ़ोन की स्क्रीन बदलवाई थी। आज वो गली के दूसरे सिरे वाले काउंटर पर है, क्योंकि दोस्त ने बताया कि वहाँ सस्ता है। आपका काम अच्छा था, पर अगली बार स्क्रीन टूटी तो उसे आपका नाम याद नहीं रहा। वो दोस्तों को बताता है कि स्क्रीन कहाँ बदली थी, और उनमें से किसी को लौटकर आने की कोई वजह नहीं दी गई।

रोशनी वाले स्टॉल के काउंटर पर बालों की सजावट और नक़ली गहने चुनती औरतें
रोशनी वाले स्टॉल के काउंटर पर बालों की सजावट और नक़ली गहने चुनती औरतें फ़ोटो: Subhadip Mukherjee, CC BY-SA 4.0

प्रेस की दुकान, चूड़ी की दुकान और रिपेयर बेंच पर पक्के ग्राहकों के ऑफ़र के साथ क्या चलता है

  • पक्के ग्राहकों के लिए ऑफ़र

    जो परिवार हर सोमवार गठरी लाता है, उसे ऐसी कटौती मिलती है जो प्रेस वाला लड़का और मालिक एक ही तरह देते हैं, बिल पर लिखी हुई।

  • फ़ोन पर बिल

    बिल की परिवार वाली कॉपी व्हाट्सऐप पर जाती है, और कुछ घटाने वाली लाइन उसमें भी है, तो दुल्हन की माँ वही कॉपी बुआ को आगे भेज सकती है।

  • उधार खाता

    पक्के ग्राहक के पन्ने पर पिछली बार के बिल रहते हैं, तो कुछ भी देने से पहले मालिक एक नज़र में देख लेता है कि वो कितने समय से आ रही है।

  • ऑनलाइन ऑर्डर

    ऑर्डर देने वाले परिवार को भी वही छूट उसके ऑर्डर में मिल सकती है।

  • रोज़ की रिपोर्ट

    पिछले शादी के मौसम के सबसे व्यस्त दिन देखिए, फिर तय कीजिए कि किन दिनों ऑफ़र देना ठीक रहेगा।

वे सवाल जो उन दुकानों से आते हैं जहाँ वही परिवार हर मौक़े पर लौटते हैं

कभी मैं प्रेस पर होता हूँ, कभी लड़का। एक ही परिवार को हर बार वही छूट कैसे मिले?

लड़के के पास सोमवार की गठरी वाले परिवारों के नामों की सूची रहनी चाहिए, क्योंकि प्रेस पर वो परिवार चेहरे से नहीं, नाम से पहचाने जाते हैं। सूची में नाम हो तो वो कटौती की लाइन उसी बिल पर डालता है, और एक परिवार को हर सोमवार एक ही ऑफ़र मिलता है, चाहे काउंटर पर आप खड़े हों या वो।

क्या परिवार के पॉइंट जमा होते हैं जो बाद में खर्च हों?

नहीं, कोई पॉइंट नहीं हैं। पक्के ग्राहक को क्या मिले ये आप तय करते हैं: सोमवार की गठरी वाले परिवार को हर सोमवार वही कटौती, बिल पर, और जिसकी स्क्रीन बदली उसे अगली बार के लिए कूपन, हाथ में थमाया हुआ।

क्या ऑफ़र सिर्फ़ शादी वाले परिवार के लिए बन सकता है, सबके लिए नहीं?

हाँ। ऑफ़र उन्हीं के नाम बनता है जिन्हें आप चुनें। बाक़ी लोग सामान्य भाव देते हैं, और बिल में फ़र्क़ दिखता है।

कोई ग्राहक पिछले साल का बनाया कूपन दिखाए, तो क्या करूँ?

वो आपका ही कूपन है, इसलिए फ़ैसला आपका है। आप उसे मान सकते हैं या ग्राहक से कह सकते हैं कि वो ख़त्म हो चुका। कूपन कब ख़त्म होता है, ये आपकी मर्ज़ी है।

एक पक्की ग्राहक सोमवार को अपनी गठरी के साथ पड़ोसन की गठरी भी ले आई है। कटौती किसकी?

कटौती आपकी सूची के परिवारों के लिए है। पड़ोसन की गठरी का अलग बिल बनाइए, सामान्य भाव पर, और ग्राहक की अपनी गठरी का बिल कटौती वाली लाइन के साथ। जो पड़ोसन हर सोमवार आए, उसे आप अपनी सूची में भी डाल सकते हैं।

हर दुकान के और सवाल

लोग आज भी नुक्कड़ की दुकान पर क्यों लौटते हैं

बिज़नेस टुडे के मुताबिक़ नवंबर 2022 के एक सर्वे में 86% भारतीयों ने मोहल्ले के किराना स्टोर से ख़रीदना पसंद किया, जबकि सिर्फ़ 2% ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप इस्तेमाल करते थे। आपकी दुकान में आने वाला ग्राहक, इस सर्वे के हिसाब से, आम भारतीय ख़रीदार है। नियमित ग्राहक को दी गई छूट उसे यही बात लौटाकर कहने का तरीक़ा है।

बिज़नेस टुडे ने 2022 में बताया कि उसी सर्वे में 10,207 लोगों से पूछा गया, जिनमें 70% ग्रामीण भारत के थे। पूछे गए दस में से सात लोग ग्रामीण भारत में रहते थे, जहाँ दुकानदार अक्सर पूरे परिवार को नाम से जानता है।