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आपकी दुकान की अपनी ऑनलाइन दुकान से ऑर्डर

ग्राहक काउंटर पर खड़ा है और फ़ोन बज रहा है। ऑर्डर अपने आप आए और आपका इंतज़ार करे।

बाज़ार की एक दुकान पर क़तार में खुली बोरियाँ, दालें, आटा और सूखी लाल मिर्चें
बाज़ार की एक दुकान पर क़तार में खुली बोरियाँ, दालें, आटा और सूखी लाल मिर्चें फ़ोटो: Timothy A. Gonsalves, CC BY-SA 4.0

मसाले की दुकान, मिठाई की दुकान और स्टेशनरी के काउंटर पर ऑर्डर के साथ क्या रहता है

  • ऑनलाइन ऑर्डर

    दफ़्तर वाली औरत की हफ़्ते भर की सूची, पाँच परिवारों के त्योहार के डिब्बे और एक क्लास की स्कूल की सूची, हर एक अपनी चीज़ों के साथ ऑर्डर बनकर आती है, फ़ोन कॉल बनकर नहीं।

  • आपकी अपनी ऑनलाइन दुकान

    जिस पन्ने से ऑर्डर आते हैं, वो WhatsApp पर उन परिवारों को भेजा जाता है जो पहले से मसाले की दुकान से मँगवाते हैं।

  • फ़ोन पर बिल

    ऑर्डर में जो लिखा था उसी से बिल बनता है, तो थैला उठाते समय ग्राहक के पास दोहराने को कुछ नहीं रहता।

  • कम स्टॉक की चेतावनी

    एक ही दाल के ऑर्डर आते जाएँ, तो सूची पर एक नज़र से दिखता है कि अगले परिवार से वादा करने से पहले कितनी बची है।

  • रोज़ की रिपोर्ट

    त्योहार के पखवाड़े के बाद दिन खोलकर देखिए कि हर दिन कितने डिब्बे गए।

मिठाई की दुकान में लकड़ी की शेल्फ़ों पर डिब्बों और रिबन में बँधी मिठाइयाँ
मिठाई की दुकान में लकड़ी की शेल्फ़ों पर डिब्बों और रिबन में बँधी मिठाइयाँ फ़ोटो: Suyash.dwivedi, CC BY-SA 4.0
छोटी किताबों की दुकान में शेल्फ़ों और किताबों के ढेर टटोलती एक औरत
छोटी किताबों की दुकान में शेल्फ़ों और किताबों के ढेर टटोलती एक औरत फ़ोटो: Biswarup Ganguly, CC BY 3.0

दुकान खुलने से पहले तैयार ऑर्डर

  • चावल, दो दाल, गुड़ और चाय, उसके बिस्तर से उठने से पहले ऑर्डर

    वो पिछली रात अपनी मेज़ पर दुकान के पन्ने से पाँच सामान चुन लेती है। सुबह सात बजे ऑर्डर आपके खाते में अपनी पाँच लाइनों के साथ है। स्कूल के बच्चों के आने से पहले आप गुड़ तौल लेते हैं, और पैक थैला काउंटर के पास उसके नाम से रखा है।

  • पैक करने वाला लड़का ऑर्डर पढ़ता है, मालिक के मन की बात नहीं

    मालिक ग्राहक को संभाल रहा है, और पैक करने वाला लड़का सिर्फ़ ऑर्डर पढ़ता है। ऑर्डर में पैक का नाम लिखा है, इसलिए वो बिना पूछे उसे भर देता है। परिवार वही ले जाता है जो उसने ऑर्डर किया था, और बिल काउंटर पर उसी ऑर्डर से बनता है।

  • स्कूल के सबसे भीड़ वाले दिन की छोटी क़तार

    स्कूल के सबसे भीड़ वाले दिन काउंटर पर क़तार छोटी रहती है, क्योंकि माँ-बाप के आने से पहले थैले पैक हो चुके होते हैं। जो माँ बग़ल की दुकान चली जाती, वो पहले ही निपट चुकी है, और जो पड़ोसी दुकान उसका धंधा ले जाती थी, उसे अब ख़ाली दरवाज़ा दिखता है।

बाज़ार में लाल साड़ी पहने मुस्कुराती औरत कान से मोबाइल फ़ोन लगाए हुए
बाज़ार में लाल साड़ी पहने मुस्कुराती औरत कान से मोबाइल फ़ोन लगाए हुए फ़ोटो: Victorgrigas, CC BY-SA 3.0

हफ़्ते भर के सामान की सूची, त्योहार का डिब्बा और स्कूल की सूची, सब फ़ोन पर बोलकर आते हैं

  • फ़ोन पर बोली गई राशन की सूची

    दफ़्तर में काम करने वाली एक औरत दोपहर को मसाले और अनाज की दुकान पर फ़ोन करती है और हफ़्ते भर की सूची बोलती है: चावल, दो तरह की दाल, गुड़, चाय का एक पैकेट। उसी वक़्त काउंटर पर खड़ा दूसरा ग्राहक हर शब्द सुनता है और इंतज़ार करता है, और आप उसके लिए तौलते हुए दूसरे कान से सूची सुनते हैं। दो दालों में से कौन-सी कही थी, ये किसी बिल की पीठ पर लिखा नहीं गया। वो शाम को आती है और थैला उसके मतलब से नहीं मिलता, और बहस में सुनने वाला दूसरा ग्राहक गवाह है।

  • त्योहार के डिब्बे जो छह अलग संदेशों में पक्के हुए

    फ़ोन में एक ही परिवार के छह संदेश पड़े हैं, और तीसरे हफ़्ते तक पक्का नहीं कि उनका मतलब क्या है। दिवाली से पहले परिवार लिखते हैं: इतने डिब्बे, यह मिक्स, फ़लाँ दिन लेने आएँगे। छह संदेश दो डिब्बे भी हो सकते हैं और छह भी। किसने कौन-सा मिक्स माँगा और किस दिन आना है, यह संदेश पलट-पलटकर ढूँढ़ना पड़ता है, और मंगलवार का तय डिब्बा आपको बुधवार को याद आता है।

  • वो फ़ोन कॉल जो लड़के को काउंटर से खींच ले जाती है

    कोई माँ स्टेशनरी की दुकान पर फ़ोन करके पूछती है कि हरा कवर और ज्योमेट्री बॉक्स आया है या नहीं। लड़का सामने खड़े ग्राहक को छोड़कर शेल्फ़ देखने चला जाता है। उसके लौटने तक ग्राहक जा चुका होता है। फ़ोन कॉल और काउंटर, दोनों एक ही जोड़ी हाथों से काम चला रहे हैं।

वे सवाल जो उन दुकानों से आते हैं जो पहले ऑर्डर पैक करती हैं और बाद में थमाती हैं

मेरे पास साइकिल वाला एक लड़का है और पाँच ऑर्डर बाहर देने हैं। क्या ऐप उसका चक्कर तय करेगा?

नहीं, चक्कर आप तय करते हैं। पाँचों ऑर्डर आपके खाते में एक सूची में हैं, हर एक पर उसका नाम और चीज़ें लिखी हैं, तो कौन-सा थैला पहले जाएगा ये सूची देखकर आप तय करते हैं।

दफ़्तर वाली औरत आधी रात को ऑर्डर देती है और मैं उसे सात बजे देखता हूँ। क्या फ़र्क़ पड़ता है?

नहीं। ऑर्डर आपके खाते में रुका रहता है। दुकान खोलने पर आप उसे देखते हैं, फ़ुरसत के वक़्त थैला पैक करते हैं और शाम को उसके आने तक तैयार रखते हैं।

एक परिवार अपना त्योहार का डिब्बा "पिछले साल जैसा" चाहता है। मुझे कैसे पता चले कि वो क्या था?

पिछले साल के त्योहार के दिन की बिक्री खोलिए, उस परिवार का बिल ढूँढ़िए और उसकी लाइनें पढ़िए। इस साल का ऑर्डर वही लाइनें दोबारा हो सकता है।

थैला पैक करते समय पता चले कि एक चीज़ बची नहीं, तो?

ग्राहक को उसी वक़्त बता दीजिए और कुछ दूसरा सुझाइए। उसने जो माँगा था वो साफ़ लिखा सामने है, तो बात सीधी हो जाती है। थैले में चुपचाप कमी रह जाए, इससे अच्छा है कि दो मिनट की बात हो।

वो एक ही ऑर्डर में चावल किलो के हिसाब से और गुड़ नग के हिसाब से लेती है। क्या ऑर्डर में दोनों आ सकते हैं?

हाँ। हर चीज़ का अपना रेट और अपना माप होता है: किलो, पैकेट या नग। ऑर्डर में दिखता है कि उसने हर माप में क्या चुना, और आप उसी के हिसाब से तौलकर पैक करते हैं।

हर दुकान के और सवाल

क्विक कॉमर्स और मोहल्ले की दुकान, दो रिपोर्टों में

पीटीआई ने नवंबर 2024 में बताया कि डेटम इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट में सर्वे किए गए 46% ग्राहकों ने कहा कि क्विक कॉमर्स की वजह से उन्होंने किराना दुकानों पर ख़र्च घटा दिया। जो ग्राहक आना बंद हो गया, वो इलाक़ा छोड़कर नहीं गया; वो फ़ोन से ऑर्डर कर रहा है।

डेटम इंटेलिजेंस के मुताबिक़ भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार 2024 के 6.1 अरब डॉलर से 2030 तक 40 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है। फ़ोन से ऑर्डर देना ऐसा काम है जो और ग्राहक करेंगे, चाहे किसी भी दुकान से मँगवाएँ। बाज़ार जो भी बन जाए, आपके फ़ोन पर साफ़ सूची की तरह आया ऑर्डर वो चीज़ है जिसे आप पूरा कर सकते हैं।