स्टाफ़ की शिफ़्ट जल्द आ रही है
ये सुविधा तैयार नहीं है। आज ये काम नहीं करती, और यहाँ कहीं नहीं लिखा कि कब करेगी।

कपड़े की दुकान में खाने की छुट्टी, मिठाई की दुकान में दिवाली से पहले की शाम और दवा की दुकान की रात
कपड़े की दुकान में तीन असिस्टेंट और खाने का एक घंटा
कपड़े की दुकान में तीन असिस्टेंट हैं और एक मालिक। खाना बारी-बारी से होता है, और कौन जाए ये मालिक उसी पल तय करता है। क्रम उसके दिमाग़ में रहता है, इसलिए कल जो असिस्टेंट पहले गया था वो आज नाराज़ है। कोई बड़ा ग्राहक आए तो वो इधर-उधर देखता है कि काउंटर पर कौन है। मालिक की याद ही अकेला रोस्टर है, और याद का भी कभी बुरा दिन होता है। कल पहले गया असिस्टेंट उसे याद रखता है, और ग्राहकों के सामने कह देता है।
दिवाली से पहले के आख़िरी पखवाड़े में मिठाई की दुकान
मददगार देर तक रुकते हैं, और कौन कब घर जाएगा ये दीवार पर टँगे कैलेंडर पर लिखा है। दूसरे हफ़्ते तक पेंसिल के निशान पढ़े नहीं जाते, और दो मददगार एक ही शाम घर चले गए हैं। काउंटर मालिक की पत्नी और चौदह साल के एक लड़के के हवाले रह जाता है। मालिक को तब पता चलता है जब कोई ग्राहक बताता है। त्योहार का पखवाड़ा साल का वो समय है जब रोस्टर सबसे ज़्यादा मायने रखता है, और वही सबसे ख़राब रखा जाता है।
रात को खुलने वाली दवा की दुकान, रातें बाँटने को दो लोग
ऐसी एक दुकान में मालिक और उसका भतीजा हर रात बारी बदलते हैं। भतीजे की परीक्षाओं से योजना हर हफ़्ते बदलती है, और बदलाव एक फ़ोन से पहुँचाया जाता है जिसे दोनों में से कोई भूल जाता है। कुछ सुबहें शटर देर से उठता है, और कुछ रातों को किसी को पक्का नहीं रहता कि वहाँ कौन होना था। भतीजे की परीक्षा का हफ़्ता वही है जिसमें योजना सबसे कम याद रहती है।


आज दुकान क्या कर सकती है, जब तक स्टाफ़ शिफ़्ट नहीं आई
हफ़्ते के कम भीड़ वाले दिन थोक वाले के पास का चक्कर
हफ़्ते के किसी कम भीड़ वाले दिन तीसरा असिस्टेंट थोक वाले के पास जाता है। वो फ़ोन से ऑर्डर ले जाता है, उस कपड़े के साथ जो कम पड़ गया था, और जो लेकर लौटता है उसे लिख लेता है। शिफ़्ट अब भी मालिक को ही लिखनी हैं, और खाने का क्रम भी, पर चक्कर अब अंदाज़ा नहीं रहा और दुकान बेवजह एक हाथ कम नहीं रहती।
मददगार मालिक से पूछे बिना गिनती पढ़ लेता है
आख़िरी पखवाड़े में मालिक तलने में लगा है और उससे कुछ पूछा नहीं जा सकता। काउंटर का मददगार फ़ोन खोलकर पढ़ लेता है कि हर मिठाई के कितने किलो बचे हैं, और परिवार को उसी वक़्त बता देता है। शिफ़्ट दीवार के कैलेंडर पर ही रहती हैं, पर गिनती के लिए कोई दुकान के आर-पार आवाज़ नहीं लगाता।
दवा की दुकान अगली सुबह रात की बिक्री देखती है
जिन रातों को मालिक और उसका भतीजा बारी-बारी से दुकान सँभालते हैं, उनकी योजना अब भी फ़ोन करके ही बनती है। रात के बिल उन्हें योजना के लिए एक पक्की बात देते हैं: आधी रात के बाद कितनी बिक्री हुई। इसके लिए किसी नई सुविधा की ज़रूरत नहीं पड़ी, बस वो बिल चाहिए जो पहले से हैं। भारतरथ शिफ़्ट नहीं बनाता और स्टाफ़ को पैसे नहीं देता। रात के बिल सिर्फ़ इतना बताते हैं कि बिक्री कब आई, और रातें मालिक और भतीजा आपस में तय करते हैं, हमेशा की तरह, उसी एक बात को देखकर।

आज क्या चलता है, जल्द आने वाली स्टाफ़ शिफ़्ट के बग़ल में
स्टाफ़ की शिफ़्ट जल्द आ रहा है
जल्द आ रही है। आज ये काम नहीं करती, और ये पन्ना नहीं कहता कि ये क्या करेगी।
रोज़ की रिपोर्ट
आज काम करता है: कपड़े की दुकान पढ़ती है कि महीने के किन दिनों काउंटर पर तीनों असिस्टेंट चाहिए थे।
कई दुकानें, एक मालिक
आज काम करता है: दो दुकानों वाला मालिक हर दुकान का दिन अलग खोलकर देखता है कि किस दुकान के काउंटर पर किस दिन दूसरा हाथ चाहिए था, और आगे के हफ़्ते की बारी वो उसी से ख़ुद सोचता है।
UPI भुगतान
आज काम करता है: जिस रात भतीजा दुकान पर था, उस रात के क्यूआर से आए पैसे सुबह पढ़े जा सकते हैं, गल्ला दो बार गिने बिना।
उस स्टाफ़ शिफ़्ट के सवाल जो अभी तैयार नहीं है
क्या मैं अभी भारतरथ में अपने स्टाफ़ की शिफ़्ट बना सकता हूँ?
नहीं। स्टाफ़ शिफ़्ट जल्द आ रही है और तैयार नहीं है। तब तक कपड़े की दुकान के तीन असिस्टेंट के खाने का क्रम वहीं रहेगा जहाँ आज है: काग़ज़ की उस पर्ची पर जिसमें तीन नाम बारी-बारी से लिखे हों, या मालिक के दिमाग़ में।
मेरे असिस्टेंट कहते हैं कि शनिवार भारी दिन था और मुझे लगा था कि शांत था। कैसे जाँचूँ?
शनिवार की बिक्री खोलिए और पढ़िए कि काउंटर पर कितने बिल बने, कुल रक़म के साथ। जिस दिन बहुत सारे छोटे बिल बने, वो दिन काउंटर पर खड़े असिस्टेंट के लिए भारी था, चाहे कुल रक़म छोटी दिखे। अगली बार शनिवार की बारी किसे देनी है, ये आप ख़ुद लिखते हैं, पर अब बात निपटाने के लिए आपके पास वो दिन है, जब चाहें देख लीजिए।
क्या ये मेरे स्टाफ़ को पैसे देगी या उनकी तनख़्वाह निकालेगी?
नहीं। भारतरथ स्टाफ़ को पैसे नहीं देता और तनख़्वाह का हिसाब नहीं निकालता। तनख़्वाह आपके और आपके स्टाफ़ के बीच ही रहती है, जैसे आज रहती है।
तब तक त्योहार की भीड़ के लिए मैं क्या करूँ?
रोज़ की रिपोर्ट में पिछले साल के भीड़ वाले दिन देखिए और उन्हीं के हिसाब से मददगार लगाइए। योजना ख़ुद आप पहले की तरह अपनी दीवार पर लिखते हैं।
क्या मुझे भारतरथ शुरू करने से पहले स्टाफ़ शिफ़्ट का इंतज़ार करना चाहिए?
नहीं। बिल, स्टॉक और दिन की बिक्री आज काम करते हैं, और वो स्टाफ़ शिफ़्ट पर निर्भर नहीं। जो काम करता है उसी से शुरू कीजिए, बाक़ी जब तैयार होगा तो आपके खाते में जुड़ सकता है।
भारत की दुकानों में काम कौन करता है, दो सरकारी आँकड़ों में
पीएलएफ़एस की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक़ नियमित वेतन वाले कामगार भारत के कार्यबल में 2024 के 22.4% से बढ़कर 2025 में 23.6% हो गए, जबकि स्वरोज़गार वाले घटकर 56.2% रह गए।
सांख्यिकी मंत्रालय के मुताबिक़ छोटे कारोबारों के कार्यबल में किसी भी और काम से ज़्यादा लोगों को दुकान के काम ने रोज़गार दिया: 2025 में भारत के अपंजीकृत ग़ैर-खेती क्षेत्र के 27.55% कामगार दूसरे खुदरा व्यापार में थे।